something like shayari

उन्होंने प्यार को मेरे अब आजमाना छोड़ दिया
भरोसा हो गया शायद कि अब ख्वाबों में आना छोड़ दिया
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कैसा करिश्मा है मेरे महबूब का
आग लगाता भी वही बुझाता भी वही
मिलता कैसे आराम उनके चाहने पर भी

कि दर्द भी वही दवा भी वही
कैसे भटक न जाऊं मैं यहाँ पर
कि मंजिल भी वही रास्ता भी वही
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कोई पूछे तो कैसे बताएं की हम क्या काम करते हैं
तुम्हारा नाम लेते हैं तुम ही को याद करते हैं
I have just beginning to write posts. So, it would be blasphemous if I try my amateurish hands on poetry. I shared poetry like work earlier also (here and here)  which I jotted down when life dictated them to me. Hope you found them worthy of reading.

क्यूँ विचलित कर जाते हो

जब एकाग्रचित हो मैं स्वप्न बुनता
प्रेम-पथिक बन जाने का
या जग को सुखद बनाने का
इस भंवर-जाल में तुमको ढूंढ़ता
या फिर मृग की तृष्णा को
स्वप्न समर्पित करके प्रियतम
जब मैं सुंदर घर बनाता
भावों के सागर में जब
डूब कर फिर उतराता रहता
तिल-तिल मैं जल कर जब
सहर्ष तुमको उजाला देता
निश्चल मेरा मन निरंतर
इन कर्मों से गीता लिखता
तब तुम मेरे प्रियवर
क्यूँ विचलित कर जाते हो
साँसों में जब बस चुके हो
ख्वाबों में क्यूँ आ जाते हो